तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने इजरायल को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम नहीं हुआ तो तुर्किए कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। इस बयान में एर्दोगन ने इजरायल पर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने और मानवीय मूल्यों की अनदेखी करते हुए हमले करने का आरोप लगाया।
हालिया हिंसा का जिक्र करते हुए एर्दोगन ने इजरायल की तीखी आलोचना की। उन्होंने लेबनान में सीजफायर वाले दिन नागरिकों की हत्या की निंदा की। एर्दोगन ने इजरायल के इन कृत्यों को जनसंहार नेटवर्क का हिस्सा बताया और तुर्किए की तरफ से और आक्रामक रुख अपनाने का संकेत दिया।
अमेरिका ने ईरान को दिया अंतिम प्रस्ताव
दूसरी ओर, अमेरिका इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद ईरान के साथ कूटनीति को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। डोनल्ड ट्रंप ने अधिकारियों द्वारा वर्णित अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव को तेहरान के सामने रखने का समर्थन किया है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा कि यह प्रस्ताव वाशिंगटन की तरफ से समझौते तक पहुंचने का आखिरी प्रयास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरे 21 घंटे की बातचीत के दौरान सीधे शामिल थे और उन्होंने ग्राउंड पर मौजूद टीम से लगातार संपर्क बनाए रखा।
ईरान ने कहीं कोई जल्दबाजी न करने की बात
हालांकि, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान का मानना है कि अब जिम्मेदारी वाशिंगटन पर है कि वह उसके प्रस्तावों पर यथार्थवादी तरीके से जवाब दे। इससे कूटनीतिक प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
ईरान की चेतावनी के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। ईरान ने कहा है कि जब तक अमेरिका उचित समझौता नहीं करता, तब तक विश्व के तेल शिपमेंट के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस सामरिक जलमार्ग में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे पूरा क्षेत्र तनाव की स्थिति में बना हुआ है।
