ईरान के साथ जारी गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप एक बार फिर से तेहरान पर हमले की योजना बना रहे हैं। इस तरह का दावा मीडिया रिपोर्ट्स में किया जा रहा है। हालांकि दोनों देश अनिश्चितकालीन संघर्ष विराम के लिए सहमति जता चुके हैं।
Axios ने बुधवार को अनाम सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए एक नई योजना तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ट्रंप को नई योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे।
ट्रंप उठा सकते हैं ये कदम
ऐसे में यह संकेत मिलता है कि ट्रंप या तो शांति वार्ता में आई रुकावट को तोड़ने के लिए या फिर युद्ध खत्म करने से पहले आखिरी प्रहार करने के लिए ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं।
CENTCOM का प्लान क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ऐसी योजना पर विचार कर रहा है जिसके तहत ईरान पर छोटे और जोरदार हमलों की एक लहर शुरू की जा सके। इसमें बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े टारगेट भी शामिल होंगे। अमेरिका को उम्मीद है कि इसके बाद तेहरान में मौजूद इस्लामी शासन बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर हो जाएगा।
अमेरिकी सेना को उम्मीद है कि जब बमों की बारिश होगी तो शांति की शर्तों पर बातचीत करते समय इस्लामी गणराज्य परमाणु मुद्दे पर शायद ज्यादा लचीला रुख अपनाएगा। ट्रंप ने पहले ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी दी है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों ने यह बताया है कि इस तरह के हमले युद्ध अपराध माने जा सकते हैं। युद्ध के दौरान मानवीय आचरण से जुड़े 1949 के जिनेवा कन्वेंशन के तहत नागरिकों के लिए जरूरी माने जाने वाली जगहों पर हमला करना प्रतिबंधित है।
दूसरा प्लान
CENTCOM की ओर से ट्रंप के साथ साझा किए जाने वाले एक अन्य प्लान में होर्मुज स्ट्रेट के एक हिस्से पर कब्जा करना है, ताकि उसे दोबारा कमर्शियल शिपिंग के लिए खोला जा सके। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के ऑपरेशन में जमीनी सेनाओं को भी शामिल किया जा सकता है।
खबरों के मुताबिक, ट्रंप ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को तेहरान के खिलाफ अपनी मुख्य सौदेबाजी की ताकत मानते हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान फिर भी झुकने को तैयार नहीं होता तो वह सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं।
तीसरा ऑप्शन
ब्रीफिंग में तीसरा विकल्प यह हो सकता है कि ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करने के लिए विशेष बलों का अभियान चलाया जाए।
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को एक आसन्न खतरा बताया है और कहा है कि तेहरान के इस्लामी शासन के खिलाफ युद्ध शुरू करने के पीछे यह एक मुख्य कारण था, जो अब 60 दिनों से भी ज्यादा समय से जारी है।
इन कदमों को उठाए जाने के पीछे की वजह
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के भी ट्रंप के साथ CENTCOM की बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। कूपर ने 28 फरवरी को जब अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने ईरान पर हमला किया, उससे दो दिन पहले ट्रंप को भी इसी तरह की ब्रीफिंग दी थी।
ईरान ने इसके जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर अपने हमले किए, जिससे मध्य-पूर्व और बाकी दुनिया गंभीर आर्थिक संकट में डूब गई।
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस ब्रीफिंग ने ट्रंप के युद्ध छेड़ने के फैसले में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, ट्रंप ने खुद Axios को बताया कि वह ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी को बमबारी से कुछ ज्यादा असरदार मानते हैं।
