पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज में लगाए गए प्रतिबंध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बावजूद ईरान का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
दरअसल, ईरान जिस होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा करके रखा है, वहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का 20% हिस्सा गुजरता है। जैसे-जैसे दुनियाभार में ऊर्जां संकट गहरा रहा है, वैसे-वैसे ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों से सुरक्षिता मार्ग के बदले लाखों डॉलर की वसूली की खबरें सामने आ रही है।
ईरान ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बनाया बंधक?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनियों के बावजूद ईरान किसी भी कीमत पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है और खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ईरान के पास ऐसे कौन से हथियार हैं, जिसके दम पर वह कूद रहा है और होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा कर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चौपट कर रहा है।
वैश्विक तेल बाजार में अफरा-तफरी
अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए हमले के एक महीने होने को है, जिससे वैश्विक तेल बाजारों में अफरा-तफरी मच गई है। लेकिन युद्ध रुकने का कोई संकेत नजर नहीं आ रहा है। ईरान की होर्मुज स्ट्रेट में पाबंदी और हमलों ने इतना भय पैदा कर दिया है कि इस जलमार्ग से होकर जाने वाले हर यातायात लगभग रुक गया है।
वैश्विक तेल और गैस की 20 प्रतिशत सप्लाई गुजरने वाला होर्मुज उर्वरकों का भी मुख्य मार्ग है, जो उन फसलों को उगाने में मदद करते हैं जिन पर दुनिया निर्भर करती है। ईरान द्वारा किए जा रहे मनमानी और होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिल रहा है।
क्यों भारी पड़ रहा ईरान का पलड़ा?
वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में हजारों और सैनिकों को तैनात करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तेल टैंकरों के लिए अमेरिकी नौसेना के संभावित एस्कॉर्ट की तलाश कर रहे हैं। इसके बावजूद ईरान का पलड़ा भारी पड़ रहा है।
इसके पीछे की वजह है ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला अपरंपरागत युद्ध तरीके, जिनमें सस्ते ड्रोन और समुद्री खदानें शामिल हैं। होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की तैनाती के कारण अमेरिका समेत दुनिया के अन्य देशों के लिए जहाजों की रक्षा करना या होर्मुज को सैन्य रूप में सुरक्षित करना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इस पर पूरी तरह ईरान का नियंत्रण है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वो इस जलमार्ग से जाने वाले कुछ टैंकरों से सुरक्षित मार्ग के लिए शुल्क वसूलना जारी रखेंगे, जबकि लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस ने 23 मार्च को एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि ईरान ने कम से कम दो जहाजों ने पार करने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया था।
होर्मुज स्ट्रेट की भौगोलिक स्थिति
होर्मुज स्ट्रेट, फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह अरब सागर तथा हिंद महासागर तक पहुंचने का एकमात्र समुद्री मार्ग है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में संयुक्त अरब अमीरात और ओमान स्थित हैं।
होर्मुज स्ट्रेट की लंबाई और चौड़ाई
होर्मुज स्ट्रेट की लंबाई लगभग 167 किलोमीटर है और इसकी चौड़ाई सबसे संकरे स्थान पर 97 किलोमीटर से घटकर लगभग 33–39 किलोमीटर ( 24 मील) तक रह जाती है। यह जहाजों के लिए बहुत सकरा होता है।
ईरान के पास लगभग 1,000 मील लंबी तटरेखा है, जहां से वह जहाज-रोधी मिसाइलें दाग सकता है। ये मिसाइल बैटरियां गतिशील हैं, जिससे इन्हें नष्ट करना कठिन हो जाता है, और खाड़ी की लंबी तटरेखा का मतलब है कि ईरान इस जलमार्ग के पास से काफी दूर तक हमला कर सकता है।
ईरान से क्यों है खतरा?
अमेरिका ईरान की कई पारंपरिक नौसैनिक क्षमताओं को कमजोर करने में कामयाब रहा है। लेकिन सबसे बड़ा खतरा अभी भी ईरान के गैर-पारंपरिक हथियारों से है, जैसे- ड्रोन, तेज गति से हमला करने वाले छोटे जहाज और यहां तक कि विस्फोटकों से भरी मानवरहित नौकाएं, जिससे ईरान कभी भी हमला कर सकता है।
क्योंकि अगर ईरानी बारूदी सुरंगें बिछाने का फैसला करते हैं, तो उन्हें एक साधारण सी दिखने वाली नाव से भी फेंका जा सकता है।
