राकेश, देवल ब्यूरो। गुरमा, सोनभद्र। सदर विकास खण्ड के ग्राम सभा मारकुंडी के किसानों ने विभागीय अधिकारियों को लिखित तहरीर देकर मुख्य सोनपंप नहर चालू कराने के लिए गुहार लगाई है। इस समय मुख्य रूप से गेहूं की बुआई और खेत पलेवा करने के मद्देनजर पानी की शख्त आवश्यकता पड़ती है। ऐसी दशा में मुख्य सोनपंप नहर के बंद होने से मारकुंडी समेत कई गांवों के किसानों में मायूसी छाई है। लोगों का आरोप है कि सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारीगण समय से नहर का संचालन नहीं करते तथा समय से पहले ही नो डिमांड दिखाकर नहर का परिचालन बंद कर देते हैं। इससे किसानों के फसलों पर बुरा असर पड़ता है तथा उपज घट जाती है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बार बार सूचना देने के बाद भी उचित कार्यवाही नहीं की जाती। इसके पूर्व में भी नहर चालू कराने के लिए जिलाधिकारी महोदय सोनभद्र से इसकी शिकायत की गई थी। वहीं मारकुंडी के कृषक राजकुमार ने बताया कि सोनपंप नहर प्रार्थी के भूमिधरी जमीन में से होकर गुजरती है, जिसका मुआवजा आज तक प्रार्थी को नहीं मिला, इसके वावजूद भी किसानों को समय से कृषि हेतु पानी न मिल पाना दु:ख का विषय है। 1972 के नहर निर्माण के दौरान किसानों की भूमि अधिग्रहण करने के पश्चात भी आज तक किसानों का मुआवजा नहीं दिया गया। सच कहें तो यह किसानों का एक दुर्भाग्य ही है। इस सम्बंध में उन्होंने आगे बताया कि विभागीय नियमानुसार सोनपंप नहर मेन्टीनेंस हेतु हर वर्ष 15 नवम्बर से 15 दिसम्बर तक नहर बंद कर सफाई आदि कार्य कराया जाता था, लेकिन इस वर्ष 6 नवम्बर को ही नहर बंद कर देने से किसानों के सैकड़ों एकड़ भूमि पानी के आभाव में उखड़ गई , जिससे गेहूँ की फसल के लिए विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। इसके पश्चात किसानों ने बताया कि नहर चालू कराने के लिए अपर आयुक्त विंध्याचल मण्डल को तहसील दिवस पर तथा समाज कल्याण मंत्री उ प्र सरकार के लेटर पैड पर भी सम्बंधित अधिकारियों को अवगत करवाया। इस पर अधिकारियों द्वारा किसानों को आश्वासन भी दिया गया लेकिन फिर भी नहर नहीं चालू नहीं की गई। मंडलायुक्त विंध्याचल मंडल व समाज कल्याण मंत्री के आदेशों की भी सिंचाई विभाग द्वारा अवहेलना की गई। कृषक राजकुमार ने एक लिखित प्रार्थना पत्र के जरिए उचित कार्यवाही की मांग किया है।