राकेश, देवल ब्यूरो। सोनभद्र। बढ़ती आबादी व शहर की ओर पलायन की उसके विस्तारीकरण में अहम भूमिका रही है। नगर पालिका हो या नगर पंचायत विकास की धुरी होने के कारण इसकी परिधि में निरंतर इजाफा हुआ है। जैसे-जैसे आबादी बढ़ी शहर भी बड़े होते चले गए। बढ़ते शहर का सबसे ज्यादा असर बाजार पर पड़ा है। बाजार की सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की रही है जहां जगह की कमी के होने के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। कुछ कमियां नीति निर्धारकों की तो कुछ आम जनमानस की भी रही है। बाजार के विकसित होते समय उसकी कुछ बुनियादी जरूरत पर शायद ध्यान दे दिया जाता तो आने वाले समय में जाम जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है। हालत यह है की बाजारों में पार्किंग की कोई व्यवस्था न होने के कारण जाम की समस्या तो रहती ही है साथ ही सड़क के किनारे गाड़ियों के खड़े रहने से उनका चालान भी काट दिया जाता है। अब ग्राहकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है की वह खरीदारी करें या फिर चालान कटवाने से बचें। जनपद में कोई भी सार्वजनिक पार्किंग व्यवस्था नहीं है। हालांकि इसके लिए सरकार द्वारा दिशा निर्देश दिए जाते रहे परंतु विभागीय शिथिलता के कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। कहीं अतिक्रमण तो कहीं रास्तों की कम चौड़ाई बाजार पर बुरा असर डाल रही है जिसका खामियाजा खरीदारों व आम जन को भुगतना पड़ रहा है। आंकड़ों की माने तो लगभग 11 माह में कुल 25 हजार वाहनों का चालान काटा गया है। पुराने बाजारों का का हाल तो बुरा है ही लेकिन नए नए खुल रहे प्रतिष्ठानों ने भी पार्किंग व्यवस्था का ध्यान नहीं रखा है। यातायात प्रभारी अविनाश सिंह का कहना है की नए खुल रहे प्रतिष्ठानों को नोटिस देकर पार्किंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएंगे। चालान काटने का मकसद किसी को परेशान करने का नहीं है बल्कि व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने का है। पुलिस प्रशासन व्यवस्था दुरुस्त करने में आम जनों कि जेबें ढीली हो रही है, जिम्मेदार मौन है तो नगर में जाम कि स्थिति बरकरार है, कोरम पूर्ति हो रहा है विकल्प नहीं वहीं उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष कौशल शर्मा का कहना है की पुलिस को चालान काटने से पहले पार्किंग की व्यवस्था मुहैया करानी चाहिए ताकि लोग अपने वाहनों को यथोचित स्थान पर खड़ा कर खरीदारी कर सकें।